Sunday, July 11, 2010

लफ्ज़ में प्रकाशित एक रचना (हर पेज पर डबल क्लिक करें और पढ़ें)



9 comments:

  1. bahut khoob sir ji. Saare "vyangya" pasand aayein.

    badhaiyaan!!

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  2. congrats sir.......awesome,kisi ek ko choose karna mushkil hai,saare hi achhe hai.
    Kya ye patrika net par available hai......agar haan to plz mujhe iska address de........

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  3. Smita ji, yah patrika AH Wheeler, Indore Railway Station par hi milti hai...agar subscribe karna ho to main phone par address bata doonga...yah vyangya aur gazhalon ki pratishthit magzine hai.

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  4. त्यागी जी,
    इतनी शानदार पत्रिका है ये ’लफ़्ज़’ और सर्कुलेशन शायद बहुत कम है इसका। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी कहकर मंगवानी पड़ती थी। व्यंग्य और गज़ल के मामले में संभवत: इसका मुकाबला कोई और पत्रिका नहीं कर सकती।
    दो साल के बाद लफ़्ज़ की रचना पढ़कर आनंद आ गया, धन्यवाद।

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  5. संजय जी, वाकई लफ्ज़ का कोई जोड़ नहीं है. आप लफ्ज़ के अनुबंधित ग्राहक बन सकते हैं। में इसका तीन-साला ग्राहक हूँ, यह मेरे घर पर आ जाती है। तीन वर्ष के लिए ३०० रुपये का ड्राफ्ट लफ्ज़ के नाम से (नोएडा या दिल्ली में देय) बनवा कर निम्न पते पर भेजें:
    मुख्य संपादक:
    विनय कृष्ण चतुर्वेदी
    (तुफैल चतुर्वेदी)
    पी-०१२ नर्मदा मार्ग, सेक्टर-११
    नोएडा-201301

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