Sunday, August 8, 2010

दुआ

मैं हमेशा से तंगदिल और कमतर इंसान नहीं था, हालातों ने मुझे ऐसा बना दिया है.  किसी समय मेरे झोंपड़े में भी दस-दस, पंद्रह- पंद्रह मेहमान हफ़्तों-हफ़्तों रहेमगर मजाल है जो अपने चेहरे पर जरा भी शिकन आई हो. आज यह आलम यह है कि दो जनों के आ जाने से ही प्राण सूखने लगते हैं. सुबह- सुबह जब फ्लश में बाल्टी भर पानी डाला जाता है तो अपना कलेजा मुंह को आने लगता है. गुसल में अतिथियों द्वारा डाला गया एक-एक मग पानी हमें अपनी नंगी पीठ पर दस-दस कोड़ों की तरह बरसता लगता है.... खुदाया या तो नल दे वरना ये दिन किसी को न दिखाए.  
                             फिर जच्चागिरी
आठ दस साल हुए फ्लेट और कार की किश्तों से फ़ारिग हुए. फिर सब तरफ से बराबर दबाव डाला जा  रहा है कि गाडी बदल लो , बँगला बुक करा लो. मतलब फिर से बैंकों के चक्कर, लोन की किश्तें चुकाने का सिलसिला. ठीक वैसा ही जैसे बच्चे बियाहे ठाए हो जाने पर किसी औरत को फिर से जच्चागिरी का शौक चर्राने लगे.
                              सच्चा भारतीय
खबर है कि अमरीका और यूरोप में आइसक्रीम सबसे जियादा खाई जाती है. खुद बराक ओबामा आइसक्रीम के दीवाने हैं. छटे चौमासे शादियों- जन्मदिनों की दावतों में मैं आइसक्रीम खा जुरूर लेता हूँ, मगर प्रेम से तो मैं गन्ना ही चूसता हूँ. इसी तरह पिज्जा बर्गर के   बदले भड़भूजे से भुनवाये चने  ही चबाना पसंद करता हूँ. तभी तो सच्चा भारतीय होने पर मैं गर्व से भर उठा हूँ!


9 comments:

  1. Its like the sequel of films. Return of water crisis, return of Jacchagiri !!
    Lovely !!

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  2. Nice one....bahut acha likha hai apne...tino paragraph ek se badkar ek the

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  3. wah wah.. aakhiri wala mein vyangya mein smjh nahi paya shayad..

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  4. Beautiful one uncle ji....kya khoob likha hai...

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  5. छा गए त्यागी सर! पानी का ब्यथा तो आप अईसा लिखे हैं जईसे दिसम्बर के भोर में रात का रखा हुआ बाल्टी भर पानी कोई हमरे ऊपर डाल दिया हो... ई जच्चगी का सौख त मत पूछिए... ई तुलना देखकर हम दंग भी हुए अऊर ई सोचने पर मजबूर भी कि केतना सच्चा उदाहरन दिए हैं आप.. किस्त मत चुकाइए तब जचगी का असली पता चलेगा जब घर पर बैंक वाला ताली बजाने भेज देगा… देते रहिए नजराना.... त्यागी सर!! मजा आ गया, आइस क्रीम त हम खएबे नहीं करते हैं!!

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  6. अच्छी प्रस्तुति।

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  7. bilkul sahi kaha aapne...
    aaj ka waqt hi kuch aisa hai...
    Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
    aapke comments ke intzaar mein...

    A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas

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  8. गंभीर बात कितनी सहजता से कह गए त्यागी जी.. बहुत सुंदर. देखने में तो चुटकुला सा लगा लेकिन बहुत सीरियस बात कह रहे हैं आप

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  9. आप सभी सुधी और गुणी जनों का तहे दिल से आभार!!

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