Monday, May 4, 2015

फोटो शूट



वे बहुत पहुंचे हुए थे. जिस पर उनकी कृपा होती उसकी जिंदगी ही बन जाती. बड़ी सिफारिशों के बाद मिलने का समय मिला. इन्हें लेकर पहुंचे तो डायरेक्टर नुमा अदा से रिवोल्विंग चेयर पर विराजे हुए थे. मिलते ही पूछा- कोई पुरानी फोटो लाये हो? हमने 'नहीं' कहा तो मन ही मन खुश नजर आये. मानो सोच रहे हों- एकदम रॉ है, बिलकुल फ्रेश मॉडल की तरह! दुनिया के सामने ला कर धमाका कर देंगें!

फिर हमें स्टूडियो भेज दिया गया. फोटोग्राफर ने बताया कि पहले बैठी मुद्रा में फोटो खींचेंगे. बोला- आप सामने की ओर पैर फैला कर बैठ जायें. 'ये पैर थोडा पीछे ले लें.' 'साड़ी पिंडलियों से ऊपर कर लें.' 'नहीं, नहीं, पैर अंदर की ओर मोड़ें.' 'हिलें नहीं, सीधे देखे.'....'बस एक मिनट.' 'ठीक!' इस तरह क्लैप शॉट ओके हो गया. ऐसा ही कुछ दूसरे पैर के साथ दोहराया गया. हमने सोचा बुद्धा मुद्रा अब ख़त्म हुई, अब विवेकानंद मुद्रा शुरू होगी. किन्तु हम गलत थे. उन्होंने अब दोनों पैर घुटनों तक मोड़ कर बैठने को कहा जैसे अक्सर लोग गमी में बैठते हैं. उसके बाद तो हद ही कर दी. पूरी जांघों तक स्ट्रिपटीज़ करा दिया. मुए ने पत्नी के बुढ़ापे की लाज तक नहीं रखी! खैर शरमा शरमी में शॉट जल्दी ओके हो गया.

अब वे अपना कैमरा उड़ा कर छत पर ले गए. फिर हुक्मनामा जारी किया- खड़े हो जाएँ. बायाँ पैर थोडा आगे, हाथ कमर पर, निगाहें सधी हुई. बचपन की सहेली की तरह स्टेच्यू बोल कर कैमरे की ओट  में जाकर प्रिव्यु देखने लगे. ओट से बाहर निकल कर सीन की सेटिंग बदली. पैर के नीचे कुशन का जैक लगा कर उसे बालिश्त भर ऊपर उठा दिया. आखिर काफी तकलीफ और थोड़ी जद्दोजहद के बाद यह शॉट भी ओके हो गया. फिर तो कैमरे की पोजीशन को लगातार बदलते हुए अलग-अलग पोज़ में न जाने कितने फोटो निकाल मारे.



खैर फोटो सेशन संपन्न हुआ. खींचे गए फोटो के नेगेटिव बारी-बारी और बारीकी से देखने के बाद डायरेक्टर उर्फ़ हड्डी-डॉक्टर ने भारी आवाज़ में फैसला सुना दिया. 'दोनों घुटने बुरी तरह घिस गए हैं....इन्हें बदलना ही इनका इलाज है.'     

13 comments:

  1. ओह , अंत में क्या निकला ! वाह जिज्ञासा बनी रही अंत तक .

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  2. वाह, आज आपके दर्शन हुए! आपका अत्यंत आभार पढने हेतु!!

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  3. पहले तो लगा की कुछ स्टीफेन लीकॉक की रचना जैसी घटना होगी! लेकिन आखिर तक जाकर बात समझ में आई!!
    गुरुमाता की स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ गयी! जल्द ही स्वास्थ्य लाभ हों.
    घा

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  4. क्या है सलिल भाई, कलम घिसाई है थोड़ी.... और थोडा आप जैसों को बुलाने का बहाना!!
    अब गुरुवायूर कार्यक्रम से शायद घुटनों को कुछ तेल पानी मिले. वर्ना डॉक्टरम शरणम् गच्छामी!

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  5. रहस्य से परिपूर्ण.

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    1. आपको बिना रहस्य के धन्यवाद

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  6. hahaa.. ghutne k dard k mareej ko model ki si feeling aa gyi hogi blog padh k! :D

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    1. और हमें फिल्म की शूटिंग पर मौजूद रहने का गौरव हासिल हुआ.

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  7. Aap abhi nahi Samjhoge ghutno ka dard....abhi apki umr ki kya hai?

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  8. छायावादी अंदाज-दर्द को आनंद जैसा अनुभव बताए,खैर।जाके पैर न फटे बेबाई।
    सो क्या जाने पीड़ पराई।।

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  9. Sir Saab, aapne hamari madam k ghutno k budhape ka chhayankan ka rehesya kuch yun ujagar kia hai k doctor bhi ek bear second opinion lene ki sochega... ����

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